STORYMIRROR

निखिल कुमार अंजान

Others

2  

निखिल कुमार अंजान

Others

जैसी करनी वैसी भरनी.....

जैसी करनी वैसी भरनी.....

1 min
349

चलो एक कहानी सुनाता हूँ

बात पुरानी तुम्हें बताता हूँ

जैसी करनी वैसी भरनी

कहावत का दृश्य दिखाता हूँ

इक नव विवाहित जोड़ा था

प्यार भी उनमें हो रहा था


प्रीत के रंग मे रंगी वो नारी

प्रेमपाश मे बंधी थी प्यारी

पुरुष दोहरे चरित्र का मानव था

उसका तो उसकी सम्पत्ति ही

निशाना था

धीरे धीरे नारी को ये आभास हुआ

सोच के मन मे बड़ा विलाप हुआ


जिसको सर्वस्व सौंप दिया अपना 

उसको इक क्षण के लिए न

पश्चाताप हुआ

वह जाकर उसके पास है बोली

प्राण नाथ सब तुम्हारा अपना है 

बिन तुम्हारे जीवन की नहीं

कोई कल्पना है

पुरुष ने ज़ोरदार अट्टहास किया 

जिस कुएँ के समक्ष खड़ी थी

उसमे धकेल दिया

फिर उसने शुरु विलासीता

का खेल किया


पराई नार के मोह मे पड़

अपना संसार उजाड़ दिया

काम लोलुपता में सुध बुध खोई 

देख इक दिन अपनी स्त्री की परछाईं

भय के मारे पागल जैसी स्थिति होई

डर से वह पल पल अब घबराए


नार जो थी प्रेयसी उसकी वह भी

अब उससे अपना पीछा छुड़ाना चाहे

फिर उसने इक षड़यंत्र रचाया

जमकर उसको मदिरा पान कराया

प्रेम क्रीड़ा के बहाने उस ही कुएँ

पास पहुँचाया

दिया धक्का उससे कुएँ में और

एक भयंकर अट्टहास लगाया

जैसी करनी वैसी भरनी का

ईश्वर ने खेल दिखाया...



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन