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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

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जादू मंतर हुआ

जादू मंतर हुआ

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तेरी नजरों से क्या जादू-मन्तर हुआ ।

एक कतरा गिरा औ समन्दर हुआ ।।


 खूबसूरत ग़जल हो गयी जिंदगी ;

तुम मिले तो मुकद्दर भी शायर हुआ ।


अश्क बनके लहू आ गया आँख से ;

जाने क्या हादसा दिल के अंदर हुआ ।


जिससे दरिया दिली की तमन्ना रही ;

सबके अंदर वो इंसान पत्थर हुआ ।



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