"इंसान तेरी बारी"
"इंसान तेरी बारी"
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कितना तूने परेशां किया
हमेशा ही मन का किया
जाल हमेशा बिछा दिया
हमें तड़पता छोड़ दिया
औरों के दिन कट गए
इंसान अब तेरी बारी है
प्रकृति ने तो भोग लिया
उसका तुम पर उधारी है
सबसे खेल लिया है तूने
अब तेरा फँसना जारी है
इंसान अब तेरी बारी है
बिन सोचें समझें बहुत कुछ किया
अब पछताना जारी है
बिन सोचें जाल बिछाया
अब खुद फँसना जारी है
समय चक्र जब चलते हैं
एक ना एक दिन, दिन फिरते हैं
अपने कर्मों का हम सब
फल एक दिन भोगते हैं
समय ने ली अंगड़ाई है
इंसान अब तेरी बारी आई है
