होली
होली
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जो लफ्ज़ बयां ना कर पाए
वो रंगों ने बयां कर दिए,
दरमियान इन्हीं रंगों के खेलते
हम ये दूरियाँ झेल गए।
था अफ़सोस और बहुत
मायूसियां
बेरंग था मेरे बिना आज
मेरा ही आशियां,
पसरी थी आज उन गलियों
में भी खामोशियाँ
लगती थी जहां महफिलें
खिल उठता था समा।
