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Rashmi Sinha

Others

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Rashmi Sinha

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होली है

होली है

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होली है

हाइकू और दोहा,

राह में टकरा गए,

इक दूजे को घूरा,

और नजरों से ही,

इक दूजे को खा गए,


सायली गर्दन उठाये,

मुस्कुरा रही थी--

कि वर्ण पिरामिड महाशय आ गए,

चौपाई और छंद, थे बहस में मशगूल,

सब इक दूजे से खुद को,

श्रेष्ठ बता गए,

लघु-कथा, लघु कथा से

तो कहानी, धारावाहिक से टकरा गई,


अजब तू-तू, मैं, मैं थी,

मछली बाजार हो ज्यों,

शब्दों का, मात्राओं का,

उधर मोबाइल और लैपटॉप के की बोर्ड,

लगता है, भांग खा गए---

जाने क्या, क्या टाइप कर,

बहुतों को गुस्सा दिला गए,


मची देख ये चिल्लपों,

रचनाकारों का समूह आ गया,

शब्दों की पिचकारी,

व्यंग की बाल्टी,

हंसी के टेसू---

बाल्टी भर-भर, 

हर विधा को नहला गए

बोलो होली है

और वो देखो,

दोहा, चौपाई, सायली, हाइकू,

गुझिया खा रहे हैं,

रंग उड़ा रहे हैं

बोलो सा रा रा रा रा!!!!


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