हकीकत या ख्वाब
हकीकत या ख्वाब
1 min
263
यद्द्पि जीवन क्षण भंगुर है
और माया भी छल है।
इस माया के रिश्तों में
उलझी दुनिया पल-पल है।
कल ही मिले थे उनसे जिनसे
रिश्तों में अनोपचारिकताएँ थीं,कुछ कही कुछ सुनी
सुख वाणियाँ व्यथाएँ थीं।
आज घनघना ई फोन की घंटी
अचानक उनके चले जाने की
खबर मिली
यकीन नही हो रहा,लगता कोई
बुरा ख्वाब है
