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Sitaram Budhibaman Behera

Others

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Sitaram Budhibaman Behera

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"है मुरलीधर "

"है मुरलीधर "

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मन मीत तुम्हारे

प्यार मे पागल

कैसे हुआ

यह ना जाना

तन मन तुमपर

अर्पण कर के

खुद को धन्य

ही माना !!


यह मन चंचल

आशा हिमालय

स्वाभाव है

भटकना

इस संसार मे

मृगजल संग

हर पल होबे

सामना

फिर भी मुरलीधर

इसारे इसारे पर

मोहजाल से

बचाना !!


आते जाते साँसो मे

हरपल 

मनमोहन बसे रहना

ऐसे मन को मोह लेना

आप ने

ना करूँ कोई भावना

प्रीतम अपनी

प्रीत मे डुबो के

हम से मुँह

ना मोड़ना !!


यह जो है मेरी

जीवन दीपक

तुम ही जलाये

रखना

अमा आंधीयारा

या घना कोहरा

साथ साथ प्रभो चलना

अंत समय 

फिर हिसाब कर के

यह प्राण ले जाना

छोटी सी अरज

सुनना !!


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