मजदूरी
मजदूरी
1 min
199
खाली बरतन खाली झोली
ये कैसी मज़बूरी है
दो रोटी के खातिर करते
दिन भर ये मजदूरी है
गरीब हर पल पिसता है
दर्द आँखो़ से रिसता है
अपनी खामोश निगाहो से
जाने क्या क्या कहता है
मेहनत कर जो मिल जाये
उसमे खुश हो जाते है
ना कल की चिंता
ना आज की फिक्र बस
एक आस मे जीते जाते है
यूँ ही मेहनत करते करते
अपने भी अच्छे दिन आएंगे
खुशियों से जीवन भर जायेंगे।।
