गहराई में छिपे राज
गहराई में छिपे राज
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कब तलक छिपा पाओगे
तुम अपने राज
गहराइयों में,
एक दिन परते तो
खुल ही जायेगी।
हज़ार मुखौटों में भी
तुम ख़ुद की असलियत
छिपा नहीं पाओगे,
पाक बने हो आज मगर
कल गुनाह सामने आएंगे।
जो गड्ढे तुमनें खोदे हैं
अपनी अमानत रखने को,
वो दिन दूर नहीं तुमसे
जब तुम खुद ही उसमे
दब जाओगे ।
