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Sajida Akram

Others

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Sajida Akram

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एक पल की ज़िन्दगानी दे

एक पल की ज़िन्दगानी दे

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एक पल में बदलती सी ज़िन्दगी है

तू हर पल बदलती सी रवानी है,

ज़िन्दगी तू कितने रुप बदलती है

ज़िन्दगानी आज देखें है, हमनें तेरे,

साथ हसीन रिश्ते भी बदलते देखें है।

तू कभी लगे अपनी सी, कभी लगे गैरों सी

एक पल की ज़िन्दगानी दे मुझे

धड़कनों की बस ज़बानी दे मुझे, 

एक पल की ज़िंदगानी दे मुझे, 

चाह कर जो, 

ना-मुकम्मल हो सकी, 

वो अधूरी सी कहानी दे मुझे, 

हो अगर मुमकिन, ऐ ज़िन्दगी

आबशारों सी रवानी दे मुझे। 

बोझ ज़ख़्मों लेकर चलती रहूँ

याद की वो बेक़रारी दे मुझे, 

हर बुलंदी से बने राहें नई, 

हौसले कुछ आसमानी दे मुझे, 

हो हौसलों को पूरा करने की 

एक नई ताक़त दे मुझे, 

एक पल की ज़िन्दगानी दे मुझे।



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