STORYMIRROR

Asmita prashant Pushpanjali

Others

3  

Asmita prashant Pushpanjali

Others

दूसरी पहचान

दूसरी पहचान

1 min
366

जरूरी नहीं ,

औरत हूँ, तो हर वक्त ,

मेरे हाथ में झाडू ही रहे।


जरूरी नहीं ,

औरत हूँ, तो हर पल,

मेरा रसोई में ही गुज़रे।


जरूरी नहीं ,

औरत हूँ, तो ताउम्र,

मैं बरतन ही मांजती रहूँ ।


जरूरी नहीं ,

औरत हूँ, तो सेवा ही,

मेरा धर्म, कर्म हो


जरूरी नहीं ,

औरत हूँ, तो बगैर

शिकायत,

मैं, उसकी मर्ज़ी से

हम बिस्तर होते रहूँ।


आखिर मैं भी तो इन्सान हूँ,

क्या इक औरत के बगैर,

मेरी दूसरी पहचान

हो नहीं सकती?



Rate this content
Log in