STORYMIRROR

Bharat Jain

Others

4  

Bharat Jain

Others

दस्तकारों के हाथों की कारीगरी

दस्तकारों के हाथों की कारीगरी

1 min
409

दस्तकारों के हाथों की कारीगरी,

महीन रेशों पर बनारस की ज़री।


खजुराहों के सभी मंदिरों जैसी,

पत्थरों पे उकरी हुई जादूगरी।


जिन्होंने बे-जुबाँ को आवाज़ दी,

वो इक खामोश सी निगाह तेरी।


जयदेव के "गीत गोविंद" वाली,

शब्दों से बजती हो कहीं बांसुरी।


फिर उस पार की किसने सोची?

इस छोर लग जाए फसल हरी भरी।


Rate this content
Log in