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Pinki Khandelwal

Romance

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Pinki Khandelwal

Romance

दिल सब जानता है पर मानता नहीं

दिल सब जानता है पर मानता नहीं

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देख उसका यूं शर्माना दिल जानता है,

करती वो भी प्यार मुझसे पर मानता नहीं,


देखती दर्द में वो मुझे आहें भरती है,

देख पर भी अनदेखा करता दिल मानता नहीं,


आंखें कहती हैं मुझसे करती वो भी प्यार है,

पर कहता नजरों का धोखा है आखिर दिल मानता नहीं,


कसूर उसका भी नहीं और मेरा भी नहींं है,

क्या करूं जब तक वो न कहें यह दिल मानता नहीं,


अक्सर जो दिखता वो सच हो यह कहना सही है,

इस कशमकश में दिल रहता और फिर मानता नहीं।


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