दिल की बातें !
दिल की बातें !
जब भी तेरी याद आई,
ग़म ने घेरा हुजूर।
ज़िंदगी तनहा बनी,
और खुद से हो चली दूर।।
किसने सोचा था कि बाजी,
हम ना जीतेंगे कभी।
दांव पर खुद को लगा कर,
अब भी हमको गुरूर।।
इश्क अपनी ज़िन्दगी है,
हुस्न अपनी चाह।
जब भी टूटा दिल हमारा,
एक निकली आह।।
मिल ना पाया इस जहां में,
जब तुम्हारा प्यार।
उस जहां में मिलने खातिर ,
कर लिए इक़रार।।
ना तो शिकवा ना गिला है ज़िंदगी से ,
रह गई होगी कमी कुछ उनकी बंदगी से।
दिल की धड़कन दिल से क्या होती जुदा ,
दिल अभी उम्मीद से है या ख़ुदा।।
