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Ritu Garg

Others

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Ritu Garg

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धुंध

धुंध

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मौन है रह कर सब कुछ समझ जाना 

अब धुंधलाने लगा 

अच्छे विचारों का आना 

धुंधलाने लगा 

मन का मुस्कुराना

अब धुंधलाने लगा 

आवेगों का आना 

फ़िर भी कुछ ना कहना 

अब धुंधलाने लाने लगा

जज्बातों में बहना अब

धुंधलाने लगा


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