धन की देन
धन की देन
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धन के पीछे तुम ना जाओ
दूर रहना इससे अभी
इसके समीप रहोगे तुम
जान नहीं पाओगे इसे कभी।
बढ़ रहा है भ्रष्टाचार
धन के पीछे काला बाजार
क्यों जाते सब इसके पीछे
धन की है माया अपार।
गरीब धन से होता परेशान
है भूखा इससे लाचार
यह कैसी कुदरत की देन
जिस से फैले अत्याचार।
जो भागता इसके पीछे
सदा रहता वह परेशान
भूल जाए वह घर परिवार
अपनों को बताए वह अनजान।
जो ना जाता है इसके पास
वही है एक सच्चा इंसान
वही जाने सारा संसार
उसी का करे सब गुणगान।
