STORYMIRROR

Sarita Kumar

Others

3  

Sarita Kumar

Others

देश के वीर

देश के वीर

1 min
225

सुलझा लेती हूं 

अपनी तमाम उलझनें

तुम्हारे हाथों की अंगुलियों में 

अपनी अंगुलियों को उलझा कर 

सुकून पा लेती हूं अक्सर 

तुम्हारे कांधे पर सर टिका कर 

तुम पास नहीं हो तो क्या हुआ 

सीमा पर तुम्हारी तैनाती 

भी जरूरी है ...

तुम्हारा शौर्य

मुझे हमेशा गौरवान्वित करती है 

तुम्हारी वर्दी जब तकिया को पहनाती हूं 

तो तकिया भी वही रौब जताता है 

तुम बर्फ की बिस्तर पर सोते हो और ओढ़ते भी बर्फ हो 

मैं रजाइयों में भी कांप जाती हूं 

तुम्हारे तकिया का सहारा है 

टिका के सर जिस पर थोड़ा सिसक लेती हूं ....

उलझा कर तुम्हारी अंगुलियों में 

अपनी अंगुलियां 

तमाम उलझनें सुलझा लेती हूं ....


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन