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Prafulla Kumar Tripathi

Children Stories Inspirational

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Prafulla Kumar Tripathi

Children Stories Inspirational

डर

डर

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डर के आगे जीत है, 

जीत ही जीवन गीत

जो डरता वह हारता, 

जीवन की यह रीत।।


डरे अगर होते सेनानी, 

आज़ादी कैसे पाते ? 

आज स्वतंत्र परिन्दे जैसे, 

गीत सुहाने हम गाते ? 


डर मन की वह स्थिति है, 

धीरे - धीरे बढ़ती है

फ़कत मानसिक स्थिति है, 

ग़र चाहो तो घटती है।।


साहस ही मनमीत है, 

जग की परिचित रीत है

जीवन इक संगीत है, 

डर इसके विपरीत है।।


भूत-प्रेत और टोटका -टोना, 

नहीं है करना रोना-धोना

तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक को, 

देना कभी न कोई कोना।।


डगर कठिन , दूर है मंज़िल, 

तुम्हें कठोर है , अब करना दिल

एक मंत्र अपनाओ सब मिल, 

साहस से पाना है मंज़िल।।



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