डर
डर
डर के आगे जीत है,
जीत ही जीवन गीत
जो डरता वह हारता,
जीवन की यह रीत।।
डरे अगर होते सेनानी,
आज़ादी कैसे पाते ?
आज स्वतंत्र परिन्दे जैसे,
गीत सुहाने हम गाते ?
डर मन की वह स्थिति है,
धीरे - धीरे बढ़ती है
फ़कत मानसिक स्थिति है,
ग़र चाहो तो घटती है।।
साहस ही मनमीत है,
जग की परिचित रीत है
जीवन इक संगीत है,
डर इसके विपरीत है।।
भूत-प्रेत और टोटका -टोना,
नहीं है करना रोना-धोना
तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक को,
देना कभी न कोई कोना।।
डगर कठिन , दूर है मंज़िल,
तुम्हें कठोर है , अब करना दिल
एक मंत्र अपनाओ सब मिल,
साहस से पाना है मंज़िल।।
