STORYMIRROR

Geeta Upadhyay

Others

3  

Geeta Upadhyay

Others

बुझते हैं चिराग.......

बुझते हैं चिराग.......

1 min
172

 बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है

 क्यों मां तेरी आंखें रह रह के भर आती हैं

और तू कभी भूले से भी नहीं मुस्कुराती है

बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है.

एक अजीब सी घबराहट दिल पर नश्तर चलाती है 

कभी तो लगता है कि सांस रुक जाती है  

बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है. 

गमों के भवंर में डूबते हैं जब कभी तो

खुशियां तूफान बन के आती है

बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है.

है भरोसा मुझे उस खुदा पर

फिर भी क्यों यह संभावनाओं की दीवार खड़ी हो जाती है

बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है.

बात नहीं इतने इसमें कोई बहलाने की 

नाकामयाबी की अंतिम सीढ़ी पर ही कामयाबी टकराती है 

बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है. 

              


Rate this content
Log in