STORYMIRROR

गीता गुप्ता 'मन'

Others

3  

गीता गुप्ता 'मन'

Others

बसन्त

बसन्त

1 min
192

पात झड़े पीत पीत

हवा चले गाये गीत

मिलते बिछड़े मीत

बासन्ती बयार है।


धूप का है तेज बढ़ा

प्रकृति में रंग चढ़ा

खिले है सुन्दर पुष्प

 छा गयी बहार है।


नव पात नव रूप

धरा बदले स्वरूप

नव कोंपल अनूप

ख़ुशी का संसार है।


दुःख आया सुख लाया

हृदय से अपनाया

पतझड़ या बसन्त

सब स्वीकार है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन