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बसंत
बसंत
बसंत
बसंत
बहुत शरारती होता है
कुदरत भी।
बहार चाहोगे
खिजा आयेगी।
धूप माँगोगे
आसमां से बूँद
मिल जायेगी।
जो नही कुछ चाहो तो
बसंत चाह जगायेगी।
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