STORYMIRROR

Sujata Kale

Others

3  

Sujata Kale

Others

बन फूल

बन फूल

1 min
333

वह सिमटती हुई 

दुधिया - सी

कोहरे की शाल से,

चेहरे पर छाए

केशों के बादल...

 

उसकी महक से

धुंद भी महकने लगती है,

उसकी रोशनी 

बिछ जाती है चारों ओर

चाँदनी सी...


हवा भी रूख बदलकर 

आ जाती है उसकी ओर,

उसकी महक से 

महक भी महकने 

लगती है...

 

वह सिमटती हुई

दुधिया - सी बन का फूल

बन फूल...


Rate this content
Log in