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Rupal Sanghavi "ઋજુ"

Others

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Rupal Sanghavi "ઋજુ"

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"बीते कल में"

"बीते कल में"

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बीते कल में क्यूं रहते हो?

आज को उद्विग्न क्यूं करते हो?.


बीत गई सो बात गई

अब भी आँखे क्यूं भरते हो?.


दामन में है आज की खुशियां

फिर भी अतीत से क्यूं डरते हो?.


समय चक्र से आगे बढ़ना

वापस मुड़ कर क्यूं चलते हो?.


वर्तमान भी पूछ रहा है

अपने आप को क्यूं छलते हो?


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