STORYMIRROR

बीते बहुत दिन

बीते बहुत दिन

1 min
13.3K


बीते बहुत दिन
लिखा नहीं एक शब्द

 

स्याही थी
खुली आँखें थी
पर लिखा नहीं एक शब्द

 

संवेदनाएं थी
लबों पर ताला भी नहीं था
पर  कहा नहीं एक शब्द

 

दुःख  है
दुःख का कारण भी है
पर सहा नहीं एक शब्द

 

आदमी अब
भीड़ लगने लगा है
जिया नहीं एक शब्द

 

आसमान का विस्तार 
सिमट आया था मुझमें
भरा नहीं गया एक शब्द

 

लगा लिया है
एक मुखौटा
न हंसता  है
न रोता है
अपना हुआ नहीं एक शब्द।

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन