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Amit Kumar Mall

Others

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Amit Kumar Mall

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खुदा थोड़ा रहम कर

खुदा थोड़ा रहम कर

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ऐ खुदा थोड़ा रहम कर

इस दुनिया को थोड़ा बेहतर कर


चूल्हे नहीं जलते दुआओ से

भूखे की दुआओ में थोड़ा असर कर


हर रोज सपने टूटते है सुबह की किरणों से

बेबसों के सपनो को थोड़ा हकीकत कर


दुनिया नहीं बदलती है पल भर में

मज़लूमो की सोचो पर थोड़ा असर कर


सूरज कैद हो गया है किसी के महलो में

जुगनुओं को थोड़ा और रौशन कर


बेकरारी, बेबसी, बेचारगी ही आदमी है

इस भूल का असर कभी थोड़ा कम कर।



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