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Harshita Dawar

Others

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Harshita Dawar

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भूलना मत

भूलना मत

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भूलता ही नहीं, मुझे

हम किसी से कम नहीं,

बेगैरतों की दुनिया में,

हमारी हस्ती भी कुछ कम नहीं।


औरत हूं भूलना मत

तुम्हारा भी कहीं अस्तित्व नहीं।

औरत से ही आते हो दुनिया में

औरत की गोद में पलते हो,

औरत की छाती में उतरता अमृत,

जो पी कर ताकत पाते हो।


नई दुनियां को देखने की रोशनी बढ़ाते हो।

औरत की ही इज्ज़त पर दाग़ लगाते हो।

दुनिया को क्या बताते हो,

गुरुर किसका हाथ थामें बैठी वो ही,

औरत है जिसने तुमको चलना सिखाया।


आज चलने लायक हो गए तो, आज उसी को तोड़ने चाहा।

तुम गद्दारी कर खिलवाड़ करते रहे।

औरत आज भी मौजूद फ़र्ज़ समझ 

साथ देती रही।

सीख को जनाब औरत की इज़्ज़त 

अब बस करो बेकद्री का खिलवाड़।

अब बस करो अब बस करो

भूलता ही नहीं बस भूलना चाहती हूं।


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