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Kumar Vikash

Others

4.0  

Kumar Vikash

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भोगी

भोगी

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यह वो शिवालय का

शिव योगी नहीं ,


बस भोगी है संसार में

विचरता रहता है !


जो संसार से उत्पन्न

जहर पी कर भी ,


धर कंठ बस समाधि में 

लीन रहता है !


इसकी क्या समसा करें

उस शिव से ,


यह तो शब्दों का जहर

उगलता रहता है !


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