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usha yadav

Others

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usha yadav

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बेजुबान

बेजुबान

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चित्कार कर उठी यह देख

 ह्रदय विदारक दृश्य 


कहां गई यह मानवता 

नहीं बची है अब बिल्कुल

 देखकर यह दृश्य 


गर्भवती थी बेजुबान थी

 पर भूख से बेहाल थी

 सोच रही थी खा इन 


फलों को मिटा रही हूँ

अपने बच्चे की भूख 


साक्षरता है जहाँअब चरण 

 पर क्रूरता और निर्दयता ने

 जैसे बुद्धि को किया है भ्रष्ट


 शर्मसार हो चुकी है मानवता 

छीन कर उस मां की सांसे 


जिसके पेट में पल रहा था 

उसका मासूम बच्चा !


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