Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Priya Kanaujia

Others

5.0  

Priya Kanaujia

Others

बचपन की यारियाँ

बचपन की यारियाँ

1 min
372


कैसे थे दिन कैसी थी यारियाँ,

याद आती है स्कूल की वो मस्तियाँ

रहती थी साथ दोस्तों की टोली,

करते थे हम दिन भर अठखेलियाँ

बेंच बन जाती थी तबला हमारा,

निकालते रहते थे हम सुर अनेक

जब भी खुलता था खाने का डब्बा,

दुश्मन भी हो जाते थे एक

जब होती थी बारिश घनघोर,

मिलकर सारे दोस्त बन जाते थे मोर

कश्ती चलती थी कागज की अपनी,

खूब झूमते हम मस्ती में चूर


Rate this content
Log in