STORYMIRROR

सोनी गुप्ता

Others

4  

सोनी गुप्ता

Others

बचपन की दोस्ती

बचपन की दोस्ती

1 min
973

उजालों में भी कोई अपना यहाँ अब दिखता नहीं, 

हमारी हर बातों को कोई यहाँ अब समझता नहीं।


आंखों में सबके ये कैसा स्वार्थ का पर्दा छा गया है, 

बचपन के दोस्तों की तरह अब कोई बोलता नहीं।


ख्वाहिशें और फरमाइशें सब दब सी गई हैं हमारी, 

अब वो बचपन की दोस्ती का सूरज कहीं उगता नहीं ।


संघर्ष ,आंदोलन और आक्रोश सबके मन में भर गया , 

इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में अब आराम मिलता नहीं I


लग रहा मैं सपनों की इस भीड़ में खो गया हूँ कहीं, 

औरों से क्या गिला, अपनों का बचपन भी अब दिखता नहीं ।


दिल बज्र हो गया सबका और एहसास दब से गए, 

बचपन के दोस्त के सिवा अब कोई हमें यहाँ समझता नहीं।


रह गए सिर्फ कागजों पर हमारे रिश्तों के सभी जज्बात, 

बचपन की दोस्ती के बारे में अब कोई पूछता ही नहीं ।



સામગ્રીને રેટ આપો
લોગિન