STORYMIRROR

अनजान रसिक

Children Stories Fantasy Inspirational

4  

अनजान रसिक

Children Stories Fantasy Inspirational

बचपन का नचपन

बचपन का नचपन

2 mins
280

बच्चों की निराली हस्ती में, मतवाला हुआ जाता हर कोई उनकी मस्ती में,

उन छोटे-छोटे नटखटता के पिटारों के संग, ढल जाती सारी दुनिया उन्हीं के रंग में।


इनको भरपूर आता पूरे घर को ढालना अपने ढंग में,

सुखद, रंग-बिरंगा और निराला अहसास होता, उनसे उठती हर तरंग में ।

सच्चा होता इनका मन, शीतल होतीं इनकी भावनाएँ,

पल में रूठ के पराये हो जाएँ, पल में गले लग कर अपना बना जाएँ ।

बचपन का लचीलापन, इसका नचपन सबसे अनोखा,सबसे अनूठा होता है,

खुश होते सब एक किलकारी पे, दुख के सागर में डूब जाते जब घर का बच्चा रूठा होता है।

उसकी तोतली मीठी बातें, उसकी वो शरारतें, बचपन का सफर पुनः करा देतीं उनको,

कोसते नहीं थकते बुढ़ापे की बीमारियों और उसकी तकलीफ़ों को जो ।

मेरी भी एक नन्ही बिटिया है, जिसके नन्हे पगों के आगमन से सुंदर बनी मेरी बगिया है,

तेज और उत्साह जीवन में रंग भर देता, चित्त प्रफुल्लित हो उठता, इस कदर प्रभावित उस से जीवन है I

पढ़ाई और शरारतों पे डांट-फटकार घर को बना देती एक युद्ध का मैदान,

सौजन्य से उसके रौनक भर जाती मेरे आशियाने में, जो अन्यथा था वीरान और बेजान ।

बाल दिवस (14 नवम्बर) के इस अवसर पर देश करता इन होनहार सितारों को सलाम,

जिन में बसते सभी के प्राण, कहलाएंगे कल जो हमारे देश की आन -बान -शान ।

इनकी मस्ती, इनकी खिलखिलाहट, इनकी ठिठोलियाँ पुनः कराती बचपन का रस-पान,

व्यथित दिलों को मिल जाता इस तरह जीवन जीने का नया आयाम ।

नए-नए आविष्कारों और विचारों से मिलता दुनिया देखने का नया दृष्टिकोण,

अपना के आधुनिक युग के तौर-तरीके, रोशन हो उठता सबका रोम-रोम।

बालपन की निश्छलता और पवित्रता होती शीतल गंगाधारा के जैसी,

मनोहर छवि, मनमोहक अदा संग कुशाग्र बुद्धि, सर्व-सम्पन्न होती बच्चों की हस्ती ।


Rate this content
Log in