बचपन का जमाना
बचपन का जमाना
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आज बचपन की याद आई
मैं लौट गयी उस जमाने में
जहां न कोई चिंता थी
न फिक्र थी कमाने की
बचपन की रात वो अजीब थी
ज़मीन पर सोए या बिस्तर पर
आंख खोलती थी हमेशा बिस्तर पर
मम्मी से झूठ बोलते थे फिर भी नहीं
पकड़े जाते थे हम यह उन दिनों की
बात है जब छोटे बच्चे थे हम
जब न रोने की वजह थी ना
हँसने का बहाना था सबसे अच्छा
दोस्तों बचपन का जमाना था।
