STORYMIRROR

Swapnil Kulshreshtha

Others

4  

Swapnil Kulshreshtha

Others

बादल और बारिश.....

बादल और बारिश.....

1 min
178

आगमन हुआ धरा पर

कुछ ऐसे ढोल नगाड़े संग।

बांहों में भर लिया धरा को

झूमा भोर सवेरे तक।


जोर से बिजली चमकी नभ में 

बादल ने गड़गड़ाहट की।

देर रात तक आंख मिचौली

धरती नभ ने मिलकर खेली।


सारे सूरज तारों से लड़कर,

बादल आए उमड़ घुमड़ कर।

भीग गया धरती का आंचल,

ऐसी जोर से बरसा बादल।


झूम उठा मन गाने को ,

उसकी पहली दस्तक से।

प्यासी धरती में नवयौवन फूटा,

बदली की गड़गड़ाहट से।


नभचर सारा झूम गया,

कलियों ने ली अंगड़ाई ।

देखो अपने साजन से मिलने ,

बरखा दौड़ी दौड़ी आई।


स्वपनिल के अश्कों से



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन