बादल और बारिश.....
बादल और बारिश.....
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आगमन हुआ धरा पर
कुछ ऐसे ढोल नगाड़े संग।
बांहों में भर लिया धरा को
झूमा भोर सवेरे तक।
जोर से बिजली चमकी नभ में
बादल ने गड़गड़ाहट की।
देर रात तक आंख मिचौली
धरती नभ ने मिलकर खेली।
सारे सूरज तारों से लड़कर,
बादल आए उमड़ घुमड़ कर।
भीग गया धरती का आंचल,
ऐसी जोर से बरसा बादल।
झूम उठा मन गाने को ,
उसकी पहली दस्तक से।
प्यासी धरती में नवयौवन फूटा,
बदली की गड़गड़ाहट से।
नभचर सारा झूम गया,
कलियों ने ली अंगड़ाई ।
देखो अपने साजन से मिलने ,
बरखा दौड़ी दौड़ी आई।
स्वपनिल के अश्कों से
