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Veena Mishra ( Ratna )

Others

5.0  

Veena Mishra ( Ratna )

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अमृत

अमृत

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नारी अमृत की वो बूँद है,

जो कभी सूखती नहीं।

समय के बादलों को चीरती ,

जिंदगी के गरम तवे पर,

ढुलकती हुई ताउम्र,

उफ तक नहीं करती।

सर्वस्व समर्पण करती।

घर परिवार की खुशियों में,

अपनी खुशी ढूँढती,

गुजार देती है जीवन तमाम ।

सिर्फ पाने के लिए,

अपनों का निस्वार्थ अनुराग।

पर कभी पा सकी है नारी,

क्या सच्चा प्रेम?


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