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अमावस का चाँद

अमावस का चाँद

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जब से उसने होश संभाला

उसने उस चाँद को देखा

चाँद का जादू उस पर छाया ऐसे

उसी का चिंतन उसी का स्वपन

उसी के जीवन की अब यही कहानी

देखना चाँद और निहारना चांदनी,


पिता को भी इच्छा अपनी बतलाई

हँसकर समझाया उन्होंने भी

अब समझ आ गया सपनों से निकलकर

वास्तविकता में जीने का

परिचितों ने भी बहुत समझाया

छोड़ दे तू उस चाँद की हठ

वो दूर है तो सबका है

अभी उपमेय है देख पड़ा तेरा सारा जीवन

जिसमे होना तुझे तन्मय है


इच्छा प्रबल थी राह कठिन थी

पर अन्नंत: वह भी तो एक मानव था

सब कुछ खोकर पाया चाँद


पर कहाँ थी उसकी वो शीतलता

कहाँ थी उसकी वो चांदनी

कहाँ थी उसकी वो सुन्दरता

ह्रदय थोड़ा सा खिन्न हुआ


सबने पूछा – तूने पाया

हमको भी तो बतलाओ

हो सके तो हमको भी जरा पास से

चाँद से मिलवाओ


उसने भी बस यही कहा

दूर है तो वो सबका है

मुझे मिला वो चाँद अमावस का है


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