ऐसो को ही तो दोस्त कहते हैं !
ऐसो को ही तो दोस्त कहते हैं !
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बिना शर्त प्यार करते हैं,
हर मौसम बहार करते हैं,
ऐसो को ही तो दोस्त कहते हैं!
जो साथ हँसते हैं,
दर्द पर हाथ रखते हैं,
ऐसो को ही तो दोस्त कहते हैं !
न दौलत, न शौहरत की दीवार,
न मज़हब, न जुबान की तलवार,
हर भेद से परे गले यूँ मिलते हैं,
ऐसो को ही तो दोस्त कहते हैं !
मीलों की जहाँ दिलों में नहीं बसती,
दिन से महीने, महीनों से सालों की जुदाई,
रिश्ते में नहीं उतरती,
लौट आते हैं बचपन, ऐसे मिलते हैं,
ऐसो को ही तो दोस्त कहते हैं !!
