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Savita Patil

Others

5.0  

Savita Patil

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अटल स्मृति

अटल स्मृति

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देह से नहीं विधमान मगर,

विचारों में जीवित हो,

“अटल” हो, अविरत हो !

 

हुआ राख धरा का या

नभ का तारका,

विदित नहीं, पर

हृदय – स्थान भारत के

तुम स्थापित हो,

“अटल” हो, अविरत हो !

 

भाव को शब्द,

शब्दों को मिली वाणी,

कही तुमने हम जन–मानस की

व्यथा कहानी,

करे स्मरण तो भारत – वर्ष

तुम पर गर्वित हो,

“अटल” हो, अविरत हो !

 

अब मौन हो,

महानिद्रा में लीन हो,

ये रत्न भारत के

अनंत में विलीन हो,

एक युग का अंत सही,

तुम नव–युग बन

फिर उदित हो,

“अटल” हो, अविरत हो !


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