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Shailaja Bhattad

Others

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Shailaja Bhattad

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आरजू

आरजू

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हवाओं का यह रूखापन

तुझ से मिलने की जद्दोजहद

सूखे पत्तों की तरह टूटता,

बिखरता दर बदर

रखता है आरजू उन लम्हों की

जब होगी फिजाओं में कुछ नमी भी।


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