आगमन बसंत का
आगमन बसंत का
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शुष्क से पतझड़ में दिखते जो
तरुवर
आगमन बसंत का
कर देता उन्हें हरित, पल्ल्वित
कमल पुष्प से हो जाते
आच्छादित सरोवर
थे जो कभी रिक्त बिना नीर...
नीरस मन हो उठते
आनंदित
बजती है वीणा की सरगम
नृत्य में रत, मन मयूर
आगमन बसंत का
कर देता उमंगित...
