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चहक Nath

Others

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चहक Nath

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आदमी....

आदमी....

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कभी धूप तो कभी छाँव बन जाता है, 


आदमी,

   औरत के लिए दरिया का नाव बन जाता है।। 


कभी अंधेरे का दीपक बनता है,

     तो कभी खुद ही सूरज बन जाता है।।। 


आदमी,

   औरत के लिए एक खूबसूरत राह बन जाता है।। 


कभी सारी मुश्किलों को मात देता है

     तो कभी दफ्न कर देता है... सीने में।।। 


आदमी, 

      औरत के बुझे सपनों की लौ बन जाता है।।। 


कभी बिन बोले ही समझ जाता है  

      कभी खुद आवाज़ ही बन जाता है।।। 


आदमी,

      औरत के जीवन का साज़ बन जाता है।। 



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