STORYMIRROR

Kanchan Prabha

Children Stories

2  

Kanchan Prabha

Children Stories

आ बैल मुझे मार

आ बैल मुझे मार

1 min
332

मैं जब चौथी मे पढ़ती थी

मेरी टीचर एक ऐसी थी

अगर कभी जो बात ना माने

पाठ कोई याद ना करके लावे

तो फिर ऐसा होता था

सब दोस्त फिर कहने लगते थे

ये क्या तुमने काम किया है

आ बैल मुझे मार को न्यौता दिया है

फिर जो पड़ती थी मार उसको

भुली नही हूँ आज भी जिसको

कभी तरस नहीं आता था

जब कोई गृह कार्य नहीं बनाता था

लगते थे फिर छड़ी दना-दन

हिल जाता था सबका तन मन

वैसे दिन अब आज कहाँ है

शिक्षक से डरना खत्म यहाँ है

दोस्त दोस्त है शिक्षक छात्र

करते दोनो मित्रवत बात



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन