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Priyesh Pal

अपने बारे में कहूं तो मैं लेखक या कवि कतई नहीं हूं। मैं रंगमंच में काफ़ी समय से सक्रिय एक विद्यार्थी हूं जो कभी कभार लिख भी लेता है। रंगकर्म करते हुए मुझे लगभग ८ साल होने को आए हैं और इस अवधि में कुछ नाटकों में अभिनय, कुछ का निर्देशन, कुछ कहानियों के नाट्य रूपांतरण किए जिन्हें बच्चों एवं बड़ों सभी के साथ प्रयोग किए। मेरी लेखनी का ज़्यादातर हिस्सा आम जीवन से आता है और माफ़ी के साथ कहना चाहूंगा की वह कटाक्ष ही होता है। कुछ प्रेम की भूली बिसरी यादें भी संजो लेता हूं। बस कोशिश रहती है बच्चों के लिए जितना हो सके करूं उन्हें एक नयी दिशा दूं। स्कूल में नाटक का शिक्षक भी हूं तो उनसे जुड़ा भी रहता हूं। read more

  Literary Captain

शुरुआत

Abstract

हमारे लिए, एक शुरुआत नयी, आप कर लो।

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आओ रावण बनें

Abstract

आओ इस दशहरे में हम रावण बनें।

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आख़िरी सफ़र

Abstract

जो दिया है तूने, और सिमट जाने की ख्वाहिश में।

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कैसे दूं तुम्हें बधाई ओ शिक्षक

Others

देखे मैंने ऐसे शिक्षक, इंसानियत की बढ़ाई वे करते।।।

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तुम जो मेरे साथ सफ़र में हो

Romance

लेकिन, हर नाराज़गी दूर होगी, हमारे अगले संवाद से।

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लाली

Tragedy Inspirational

लाली, चली गयी है, दुकान जाना, अब बेमतलब है, पार्ले जी, अब अच्छा नहीं लगता, इंतज़ार, त...

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शहीद

Abstract

मरता कौन ? सिर्फ़ इंसान, और इंसानियत।

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तुम जो मेरे साथ सफ़र में थी

Romance

तुम्हें अपना राज़दार बना लेने के बाद,मैंने आज यह तय कर लिया है।

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आज़ाद ग़ुलाम

Others

यह कविता उपजी है नौकरशाह सोच के प्रति घृणा से, भ्रष्ट सरकारी तंत्र के प्रति क्रोध से, धर्म के आडम्बर...

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आओ रचे इक जहां

Inspirational

क्योंकि आहत हूँ देखकर, असंवेन्दनशील चिकित्सक, व्यापारी शिक्षक, रिश्वतखोर रक्षक दिशाही...

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