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कराहों का कोलाज
कराहों का कोलाज
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© Kapil Jain

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अंधे जुगनुओं की बाढ़ में
डूबकर खूजराहों की
ख्वाब गाह मे
रोते हुए अधमरे दीपकों को
अगर तुम सुन सकते
तो तुम्हे पता चलता
कि प्रेम की सबसे
सफल परिभाषा
कराहों का कोलाज ही है !
उलझे हुए भीतचित्रों में
उलझी हुई उलझन को
अगर तुम देख सकते
तो तुम्हे पता चलता
कि प्रेम लहू में
जंग खाए हुए ब्लेड
और दीमकों की
ख़ामोशी के सिवा
कुछ भी नहीं है !
तुम अगर चेहरों
की चपेट में आए
भावों का भाव लगा सकते
तो तुम जान सकते
कि इनकी कीमत
ढहे हुए मदिंरो पर उगे
पीपल या बरगद के पेड़
के हरेपन से भी
कहीं ज्यादा है !
अगर तुम्हे पता होता
एकांत के सहवास
और चुप्पी के सम्भोग से
पैदा हुए सन्नाटे
कहाँ रहते है ?
तो तुम मुझ तक
पहुँच सकते थे !
अगर प्यास के पाँव पर
पड़े छाले
और सफर में साथ
चलते फासले
अपना दर्द कह सकते
तो मैं तुम्हे अपनी
ठीक ठाक
पहचान बता देता !
पर टूट कर प्यार करना
समय की काँख में
दबा होना होता है
और बहुत सारे
अगर और काश
यदि तुम समझ सकते
कि कोई नहीं मरना चाहता
अगर और काशों की मार से
कोई नहीं चाहता
टूटे हुए मदिरों पर
बरगद या पीपल की तरह उगना
कोई नहीं चाहता
कि उसकी नस नस में
जंग खाए हुए ब्लेड
और दीमकों की
ख़ामोशी बहे
कोई नहीं चाहता
सफर में प्यासे पाँव
फासलों को ढोते हुए चलना
कोई नहीं चाहता
समय की काँख में दबना
अगर तुम ये सब समझ सकते
तो तुम मुझसे प्यार कर रहे होते !


कराहों का कोलाज

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