माँ अमर है
माँ अमर है
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माँ ज़िंदा रहती है
हमेशा अपनी बेटियों में
हमेशा उनकी रसोई मे
उनके काम के तरीके मे
वो ज़िंदा रहती है अपनी
बेटियों की मुस्कुराहट में
उनकी खुशियों में
उनके पहनावे मे
वो झलकती है बेटियों के
माथे की बिंदी मे
कभी कभी बंधे हुए बालों में
पुराने कंगन में कभी
कभी आंगन की रंगोली में
हर उत्सव की तैयारी में
हर पूजा की थाली में
माँ गाती है बेटियों के भजनों में
माँ रहती है बेटियों के नगमों में
माँ ज़िंदा रहती है हमेशा।
