क्या यह विकास?
क्या यह विकास?
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मेरे घर के आंगन में था
एक पेड़
जिस पर था तिनकों का
एक नीड़।
उसमें रहती थी
छोटी सी,
प्यारी सी,
एक गौरैया।
दिन भर घर में गूंजा करता
उसकी चीं - चीं का स्वर।
शहरीकरण की चली जो आंधी
न रहा आंगन,
न रहा पेड़,
न रहा नीड़,
और न ही गौरैया।
क्या यह है विकास?
