नारी तुम अवतार धरो
नारी तुम अवतार धरो
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तू जीवनदायिनी प्रकृति
पाप विनाशनी माँ दुर्गा तू
संकट भारी आन पड़ा
माँ धरा का हृदय फटा
कर रहे दुष्ट अट्टहास
मचा रहे हाहाकार
लेकर मानव का रूप
दानव कर रहे है भक्षण
मानव जीवन दुष्कर हुआ है
आकर दो तुम सरंक्षण
तुम्हारी संतान हैं हम
दूर करो हमारा अज्ञान
ले कटार करकमलों में
दुष्टों का संहार करो
इस धरा के कष्ट हरो
हे अम्बे अब अवतार धरो!
