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Ira Johri

Others

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Ira Johri

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काव्य

काव्य

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अहा कितना सुहाना मौसम है।

चल रही शीतल मस्त बयार है।


खिलखिलाते पुष्प हर चमन है।

सच कह दूँ हमको इनसे प्यार है।


मन बहका जाता है मेरा आज तो।

अजब सा चढ़ा हमें यह खुमार है।


मदहोशी का जाने कैसा आलम है।

हर तरफ बिखरा शबाब बेशुमार है।


बिना किसी के कुछ भी रुकता नही।

बगिया इरा की आज भी गुलज़ार है।


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