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Sheetal Raghav

Others

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Sheetal Raghav

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यारियां

यारियां

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थी वह, 

दोस्ती बहुत ही प्यारी,

शायद सबसे खास,

दोस्ती थी हमारी,

वह कॉलेज के दिन, 

वो उन दिनों की यारी,

क्या बताऊं, 

कितना कुछ है, 

कहने को, 

और

क्या - क्या सुनाऊं?


कितनी खूबसूरत थी,

वो उन दिनों की यारी,

हम दोस्तों में, 

सब कुछ खास था,

सबका अपना - अपना, 

दोस्ती का, 

नया अंदाज था, 


हम थे, 

लड़के या लड़कियां,

कोई था, 

हममें फर्क नहीं, 

इस बात का,

वह आधी - आधी, 

रातों तक जागना, 

मैसेंजर के थ्रू, 

बात करना,

और,

लड़ जाना,

रूठना, मनाना,

यह सब कुछ, 

तो था नॉर्मल, 

था,

कुछ खास तो, 

हम यारों के बीच का,

प्यार था, 


वो कैंटीन में नाचना, 

प्लेट, तोड़ना, 

माफी, मांगना, 

और,

रेमो की कैंटीन में, 

जाकर,

वो बर्तनों का मांजना,

यह सब कुछ, 

तो था नॉर्मल,

खास था तो, 

हम यारों का साथ, 

रहना खास था,


क्लास में जाना, 

जाते ही डांट खाना, 

सजा के नाम पर, 

एक साथ,

बाहर आ जाना,

क्लास में, 

बंक मारकर, 

कैंटीन में गाने गाना, 

यह सब तो, 

था नॉर्मल, 

खास था तो,

सजा में भी, 

यारों का साथ पाना, 


और,

खास थी, 

एक अलग सी यारी, 

जिसका नहीं कोई, 

नाम था, 

वह दोस्ती थी,

वह प्यार था, 

या कुछ और था, 

वह तो पता नहीं,

पर बहुत ही खास था,


आज, 

कॉलेज से बाहर,

सबकी,

अपनी अपनी दुनिया है,

मगर आज भी,

दिल के कोने में,

वह कॉलेज की, 

प्यार वाली,

यारियां हैं,

वो यारियां, 

सच में खास थी,


रोज कॉलेज जाने की, 

एक अलग सी ही, 

चाहत थी,

जिसमें प्यार के साथ, 

थोड़ी तकरार भी थी,

कितनी अजीब,

वो,

कॉलेज वाली, 

यारियां थी,


वो फाइनल ईयर,

वो बेसब्रियां, 

किसको कहां, 

एडमिशन मिला,

इसकी भी बेताबियां, 

सबको था,

एक साथ में रहना, 

इसकी भी थी,

कितनी बेचैनियां, 

कितनी खूबसूरत थी,

वह प्यार वाली, 

यारियां, 

दूर होकर भी,

खास थी,

और,

पास थी,


जो नजदीक, 

और, 

बहुत ही

खास थी,

कितनी, 

खूबसूरत थी,

वह प्यार वाली, 

यारियां,

दूर रहकर भी, 

रही पास थी, 

जो नजदीक, 

और,

बहुत ही खास थी,

आज भी,

हम यारों में हैं, 

वह नज़दीकियां,


याद आती है,

आज भी,

वह कॉलेज वाली,

यारियां।।


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