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D.N. Jha

Others

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D.N. Jha

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दीपक

दीपक

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बाती जलती है,तेल जलता है।

फिर दिए तेरा खेल चलता है।

न बाती जलती न तेल जलता।

'दीपक'कैसे तेरा खेल चलता।


नहीं बगावत बाती से होती।

नहीं तिरस्कार तेल का होता।

बेमेल कोई खेल नहीं होता।

सब खेल यहां मेल का होता।


हवाएं अपना जोर दिखाती है।

'दीपक' भी साहस दिखाता है।

हवाएं अपना काम करती है।

'दीपक' अपना काम करता है।



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