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Wohoo!,
Dear user,
  दुःख !
दुःख !
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© Arun Pradeep

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मेरे पास क्यूँ नहीं आता ?

शायद तू मुझे भी

दूसरों जैसा समझता है ,

 

तू किसी को नहीं भाता

ये मुझे  है पता .

पर मैं तो तुझे स्वयं

दे रहा हूँ निमंत्रण ,

मुझे पता है

रहीम ने भी किया था तेरा वंदन !

पढ़ कर ये निवेदन

शायद और भी

आने लगें तुझे आमंत्रण !

तेरे आने से मेरा यह

अवश्य हल्का हो जाऐगा ,

टन भर का तन

गालों पर चढ़े गाल

 

जब थोड़ा होंगे  कम,

तभी खुल पाऐंगे

मेरे मूँदे नयन !

 

और यह छप्पन इंची

कमर हो जाऐगी थोड़ी कम

लगने लगेंगे तब

सस्ते - छोटे कमरबंद !

क्या तुझे पता है

वज़न घटाने की दुकानों में

कितनी है महँगाई !

इसीलिऐ कहता हूँ -

ऐ दुःख तू

मेरे पास आजा भाई !

तेरे आने से शायद

मेरी इंसानियत जाग जाऐगी ,

सच्चे मित्रों से

परिचय कराऐगी !

मुझे यक़ीं है मेरी आँखों में

और बढ़ेगा तेरा सम्मान ,

बस देर न कर अब

आजा तू बन मेरा मेहमान !! 

 

LAUGHTER

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